मधुबन अंबर


चांद सी जगमगाती, शीतल, सुंदर
बादलों की परछाई से छुपकर
आगे आगे बढ़ती जाती, 
रातें कटती, बाते चलती
उस चंद्रकिरण की रोशनी में!

फिर चांद भी मुस्कुराकर
खिल उठा उस प्रेम गीत पर
चांदनी नाचे उसी धुनपर
आज बना, मधुबन अंबर
उस नित नए आंगन में !
- हर्षल

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